खाद्य पदार्थों का संरक्षण, संरक्षित करने की विधियां, संरक्षण करने के कारण एवं उसका महत्व खाद्य पदार्थों की सुरक्षा कैसे करें

गर्मी एवं नमी दोनों ही स्थितियों में जीवाणु एवं भभूति शीघ्रता से पनपते हैं जीवाणु एवं सपूत वायु में हमेशा विधमान रहते हैं यही खाद्य पदार्थों को सढ़ाने का भी काम करते हैं यदि खाद पदार्थों में इनके बढ़ने पर नियंत्रण पा लिया जाए तो भोजन को सड़ने से बचाया जा सकता है यही नियंत्रण भोज्य पदार्थों का संरक्षण कहलाता है।

यदि हम भोज पदार्थों या खाद्य सामग्री का संरक्षण ना करें तो क्या नुकसान होगा

खाने वाली सामग्री का सही ढंग से रखरखाव या देखभाल ना किया जाए तो कई नुकसान होते हैं

1 उनमें घुन एवं फफूंद लग जाती है

2 उनके रूप रंग एवं गंद में बदलाव आ जाता है

3 स्वाद खराब हो जाता है

4 खाने की सामग्री के पोषक तत्वों में कमी आ जाती है

5 गुण एवं कीड़े मकोड़ों द्वारा निकलने वाले उत्सर्जित पदार्थों का सामग्री हमें मिल जाने से खाने की सामग्री जहरीले भी हो सकती है

हमें अपने घर में आई हुई सभी खाने की चीजों को सही ढंग से उनको रखना चाहिए ध्यान रखें कि सभी खाने की सामग्री को हम एक ही ढंग से सुरक्षित नहीं रखते हैं कॉल सामग्री की नष्ट होने की क्षमता को ध्यान में रखकर उसका ध्यान रखते हैं हम खाने के पदार्थों के नष्ट होने की क्षमता स्कोर अच्छी तरह से रख सकते हैं

जल्दी नष्ट ना होने वाले पदार्थ

इसके अंतर्गत खदान नंदा ले मसाले सूखे मेवे घी तेल आते हैं।

शीघ्र नष्ट होने वाले पदार्थ

इसके अंतर्गत दूध दूध से बने पदार्थ फल सब्जियां अंडा मांस और मछली आते हैं

शीघ्र नष्ट ना होने वाले पदार्थों का संरक्षण

इस श्रेणी के खाद पदार्थों में नमी की मात्रा कम होती है इसलिए यह देर से नष्ट या खराब होते हैं कुछ दिनों के बाद मैंने धूप में रखा जाना जरूरी होता है अनाज दालें मसाले सूखे मेवे तथा श्रेणी में आते हैं इस स्टडी के खाद पदार्थों को हम ऐसे संरक्षित कर सकते हैं

घरेलू बिधि

इस विधि में लाल मिर्च व सूची नीम की पत्तियों को अनाज में मिलाकर विरुद्ध बंधुओं में पैक करके रखें मसाले मेरे को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका है कि उन्हें धूप दिखाकर ऐसे डिब्बों में पैक करके रखें जिनमें नबी या वायु ना जा सके

कीटनाशक दवाओं का प्रयोग

कीटनाशक दवाओं को अनाज में मिलाकर रखने से गुणा भाग कीड़ों से अनाज सुरक्षित रहता है अनाज को प्रयोग करने से पूर्व उसे अच्छी तरह धोकर प्रयोग करें

फ्यमीगेशन बिधि

अनाज भंडारण का सबसे अच्छा एवं सुरक्षित तरीका है इस विधि में ऐसे रसायनों का प्रयोग करते हैं जो गैसीय अवस्था में परिवर्तित होकर पूरे अनाज में फैल जाते हैं इस विधि में स्थाई लीन डिब्रोमाइड इथाईलीन राय क्लोराइड एवं कार्बन टेट्राक्लोराइड जैसे रसायनों को अनाज में मिलाते हैं यह रसायन द्रव अवस्था में छोटी डिब्बों में रहते हैं अनाज में रखने से पूर्व डिब्बों को तोड़ देते हैं अनाज को प्रयोग में लाने से पहले अच्छी तरह धोया जाता है

शीघ्र नष्ट होने वाले पदार्थों का संग्रह

इस समूह में ऐसे खाने वाले पदार्थ आते हैं जो अधिक नमी युक्त होते हैं जैसे दूध दही फल सब्जियां अंडा मांस मछली ऐसे पदार्थों को यथासंभव ताजा ही खाना ठीक रहता है यदि फल एवं सब्जियां एक या 2 दिन रखने भी पड़े तो सुरक्षित रखा जाना आवश्यक है

ठंडी बिधि

हरी सब्जियों के ऊपर ठंडे पानी का छिड़काव करते रहने से 2 दिन तक सुरक्षित रख सकते हैं दूध एवं दे जैसे बहुत पदार्थों को किसी बर्तन में रखकर ठंडे पानी में रखने से सुरक्षित रखे जा सकते हैं

यदि फ्रिज उपलब्ध है तो फ्री जिया आइस बॉक्स में हरी सब्जियां पका भोजन दूध दही मक्खन एवं फल कई दिनों तक सुरक्षित रखते हैं फ्रिज में फल एवं सब्जियां थैलियों में रखनी चाहिए

गर्म बिधि

इस विधि में भोज पदार्थों को थोड़े-थोड़े अंतराल पर गर्म किया जाता है जिससे जीवाणु एंजाइम कबक नष्ट हो जाते हैं दूध एवं भोजन को 5 घंटे के अंतराल पर वाले ने से उन्हें खराब होने से बचाया जा सकता है

निर्जलीकरण बिधि

खाद्य सामग्री से नमी – ही निर्जलीकरण है इस विधि में खाद सामग्री में उपस्थित होना में धूप द्वारा सुखाकर निकल जाती है जब खाद सामग्री में नमी नहीं रहती है तो यह बड़ों का भक्त है बम पंजाब सक्रिय नहीं हो पाते हैं एवं खाद सामग्री सुरक्षित रहती है वह भी करेला भिंडी मैथी धनिया एवं बालक को धूप में सुखा लेते हैं जब उसमें से नमी खत्म हो जाती है तो उसे बाय रोड डिब्बों में बंद करके रख देते हैं द्वारा ही पके आम के फलों के रस को सुखाकर आंबट मनाया जाता है

परिरक्षण विधि

खोज पदार्थों में विभिन्न घरेलू रासायनिक पदार्थों जैसे नमक चीनी हल्दी याद दिला दी को मिलाकर सुनिश्चित करना परिरक्षण विधि कहलाती है

चीनी के घोल में परिरक्षण

सेब अंगूर अमरुद जैसे फलों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें चीनी की गाड़ी जाटनी में पकाते हैं पर आरक्षण विधि से मुरब्बा जैन एवं जेली बनाकर सुरक्षित रखते हैं

नमक तेल एवं मसाले द्वारा परिरक्षण

कई प्रकार के खाद्य सामग्री को आजाद एवं चटनी के रूप में संरक्षित करते हैं जैसे कच्चे आम को छीलकर काटकर नमक तेल अचार के मसाले को मिलाकर सुरक्षित रखते हैं

हेमीकरण विधि

सोने अंश सेल्सियस से नीचे के तापमान पर जीवाणु फफूंद या एंजॉय निष्क्रिय हो जाते हैं बड़े-बड़े शीतला एवं में आलू आम से जैसे खाद पदार्थों को इसी विधि से बहुत दिनों तक संरक्षित करके रखते हैं

संरक्षण का महत्व

1 खाद्य सामग्रियों को घुन फफूदी एव अन्य कीटाणुओं से सुरक्षित रखना

2 बिना मौसम वाले फलों एवं सब्जियों का उपलब्ध होना

3 आवश्यकता से अधिक पैदा होने वाले अनाज को सुरक्षित रखना

4 आवाज फलों एवं सब्जियों को दूर के स्थान पर भेजने के लिए

5 पके हुए भोज पदार्थों को संरक्षित रखकर उनका द्वारा उपयोग करने पर समय एवं ईंधन की बचत होना

भविष्य के लिए खाद पदार्थों की सुरक्षा मानब मूल्य है।

भारत में अधिकतर खाद पदार्थों का उत्पादन मौसम के अनुसार होता है परिवारों में यह परंपरा रही है कि पर स्वर के लिए अनाज एवं दालें खरीद लेते हैं क्योंकि इस मौसम में इनका उत्पादन होता है उस मौसम में कम दाम पर उपलब्ध हो जाती

एक साथ अधिक मात्रा में खरीद लेने पर एक प्रकार की सुरक्षा की भावना भी बनी रहती है कि कभी अधिक धन की कमी भी हो तो खाने में कोई कमी नहीं रहेगी

सरकार भी भंडार की राहों में गेहूं चावल दाल आदि का भंडारण करती है जिससे आपातकाल में देश में उनकी कमी ना हो किसान भी जब राज को गाते हैं तो अपने वर्ष भर के लिए चक्कर से समाज को बेचते हैं

व्यक्तिगत तथा पर्यावरणीय स्वच्छता( Personal and environmental hygiene)h

व्यक्तिगत तथा पर्यावरण स्वच्छता का हमारे स्वास्थ्य से घनिष्ठ संबंध हमारा स्वास्थ्य सफाई पर ही निर्भर करता है व्यक्तिगत सफाई के लिए हमारे शरीर तथा उसके अंगों की सफाई आती है पर्यावरणीय स्वच्छता का संबंध घर पास पड़ोस सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता से है यदि हम व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान देते हैं और पर्यावरण स्वच्छता पर ध्यान नहीं देते हैं तो ऐसी स्थिति में पर्यावरण वातावरण के दूषित होने के कारण हमें ना तो सब चल ना सब छपा और ना ही शख्स भोजन मिल पाएगा कुछ तो कमी में पर्यावरण के कीटाणु हमारे शरीर को रोगी बना देते हैं

व्यक्तिगत स्वच्छता

व्यक्तिगत स्वच्छता का हमारे जीवन में बहुत महत्व है व्यक्तिगत स्वच्छता की कमी से हम तरह-तरह की बीमारियों से पीड़ित हो जाते हैं इसलिए हम रोज अपने शरीर तथा सभी अंगों की स्वच्छता पर ध्यान देते हैं हमें अपने शरीर की सफाई क्यों कब और कैसे करनी चाहिए को नीचे इस पोस्ट में बताया गया है

बांशरुम से आने के बाद तुरंत साबुन से हाथ धोना चाहिए

रोज टूथपेस्ट करना चाहिए

प्रतिदिन नहाना चाहिए

बालों की सफाई अच्छी तरह करनी चाहिए

हमारे शरीर की त्वचा में अनेक छोटे-छोटे छेद होते हैं जिन से पसीना निकलता है पसीने के साथ धूल मिल कर त्वचा पर जम जाती है धूल में बहुत कीटाणु होते हैं त्वचा को सख्त ना किया जाए तुम दूध में पाए जाने वाले कीटाणु शरीर में रमेश ठोकर शरीर को रोगी बना देते हैं घर में देवेंद्र कार के काम करने का सफाई करने से हमारे हाथ में धोलापानी कीटाणु संपर्क में आते

सुबह उठना करके हाथ पैर को साफ करके नहाना चाहिए

स्नान करते समय सभी अंगों को अच्छी तरह साफ करना चाहिए

टॉयलेट के बाद हाथ को साबुन से धोना चाहिए खाने से पहले हाथ अच्छी तरह साफ करें

खाना खाने के बाद हम दातों को साफ नहीं करते हैं तो खाने के कुछ और समूह में रहने से सड़ जाते हैं इससे तो गाड़ी उत्पन्न होकर शरीर को रोगी बना देते हैं दांतों को ठीक से कार से सफाई ना करने से पायरिया रोग हो जाता है जिससे मुंह में मां-बाप और दुर्गंध आती है

सुबह उठकर सोने से पहले खाना खाने के तुरंत बाद जरा खाना खाने के फायदे मुहूर्त आंतों की सफाई अच्छे से करें

आंखों में धूल के कण हवाई में उड़ते हुए कीटाणु क्यों गुस्सा आने से सो कर उठने के बाद आंख में लगे कीचड़ को गंदी उम्मीद से साफ करने में कंधे हाथ माता रुमाल से आंखों को पहुंचने के कारण

सो कर उठने के बाद तथा रात में सोने से पहले आंखों को दो बाहर या दूसरे क्षेत्रों से घूम कर लौटने के बाद आंखों को साफ ठंडे पानी से धोएं

सर मंजन करने के बाद तथा रात में सोने से पहले साफ पानी से आंखों को धोकर साफ तो ले से पहुंचे जब लगे की आंख में धूल जाता और कराई है तब आंखों को साफ पानी से धोए।

कान में मेल को साफ करने के लिए समय-समय पर जांच कराएं

डॉक्टर से संपर्क करके कान की जांच कराएं

डॉक्टर के परामर्श के अनुसार कान का उपचार करें

सांस लेते समय कंधे तथा विषैले पदार्थ मार्ग में प्रवेश कर जाते हैं

प्रतिदिन सुबह नहाते समय नाक साफ करें

प्रतिदिन हाथ धोते समय नाक साफ करें

पर्यावरणीय स्वच्छता

पर्यावरण स्वच्छता में हमारे घर आसपास तथा सार्वजनिक स्थानों तथा अपने चारों ओर के वातावरण की स्वच्छता आती है

इसके स्वच्छता की कमी से हमें शख्स तथा कीटाणु रहित जल वायु तथा खाना नहीं मिल पाता है जिन से हमारे शरीर में बहुत बीमारियां हो जाती हैं

कारखानों तथा फैक्ट्रियों को शहर से दूर लगाना

चिमनिया को ऊंचा करना चिमनी मे फिल्टर का उपयोग करना

स्कूटर कार और अन्य वाहनों से निकलने वाले दोहे को जांच कराकर नियंत्रित रखना

कूड़ा कचरा सार्वजनिक स्थल नदी तालाबों आदि में न डालना

जल स्रोत के समीप सोचना करना ना कपड़े धोना

उद्योगों के अपशिष्ट पदार्थों को नदियों का तालाबों में डालना

मैदानों में खुली जगह में मूत्र का त्याग ना करना

पटाखे सार्वजनिक स्थानों पर ना छोड़ना

खाने की चीजों को उठाकर सुरक्षित रखना

प्रतिदिन के प्रयोग में आने वाले सामानों की सफाई रखना

मैं अपने घर में सभी के साथ सभी कार्यों में हाथ बढ़ाते हैं काम करने के लिए बहुत सारी चीजों की जरूरत पड़ती है अपने घर में रोज प्रयोग में आने वाले सामानों की सूची बनाइए इन सामानों की हमें अच्छे से सफाई एवं सुरक्षा कर्मी आप हम अपने घर के सामान की सफाई और सुरक्षा करते हैं

घर के सामान का उपयोग करके उसकी सफाई के साथ सुरक्षित एवं निर्धारित स्थान पर रखते हैं से वस्तु खराब नहीं होती है तथा जरूरत पड़ने पर आसानी से मिल जाती है

इस पोस्ट में पर्यावरण और अपनी खुद की साफ सफाई के बारे में बताया है और आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो सोशल मीडिया और अपने दोस्तों को शेयर करें

बच्चे के जन्म से ही उचित स्वास्थ्य एवं शारीरिक वृद्धि विकास किस प्रकार करना चाहिए(How should one develop proper health and physical growth from the birth of the child?)

बढ़ते हुए बच्चे की देखभाल-

बच्चे के जन्म के बाद उसके निरंतर हो रही वृद्धि तथा उचित देखभाल बढ़ते बच्चे को निरंतर कुशल देखभाल की आवश्यकता होती है इसके बाद बच्चे के समुचित विकास हेतु उचित पोषण स्वच्छता एवं रोग से बचने के लिए टीके आते हैं अगर शुरू से ही बढ़ते बच्चे को उचित देखभाल नहीं की जाती है तो वह अन्य बीमारियों का शिकार हो जाता है यह बीमारियां आगे चलकर बच्चे का संपूर्ण जीवन कष्ट में बना देती हैं और अक्सर मौत का भी कारण बनती हैं कितने पोलियो तपेदिक खसरा गला घोटू काले खांसी टाइफाइड हेपेटाइटिस जैसे कितनी बीमारियां बच्चे की उचित निगरानी न रख पाने के कारण होती है

वृद्धि निगरानी का महत्व

हर माता-पिता के लिए आवश्यक है कि वे बच्चे का समय-समय पर निर्धारित प्रीत रक्षक टीके लगवा दे रहे ऐसा करने से बढ़ते बच्चे का शरीर का उचित विकास होता है तथा वह भविष्य में होने वाली बीमारियों से सुरक्षित हो जाते हैं

प्रतिरक्षण का महत्व

प्रत्येक व्यक्ति में रोगों से बचाव की प्राकृतिक क्षमता होती है जब किसी बीमारी के रोगाणु जीवाणु और विषाणु शरीर में प्रवेश करते हैं तो शरीर की प्राकृतिक क्षमता उनका मुकाबला करती है यदि शरीर की प्राकृतिक क्षमता बचाओ प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है तो रोग ग्रस्त होने की आशंका बढ़ जाती है शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं रखने और की आवश्यकता होती है शरीर की एंटी पावर को हमेशा बनाए रखने के लिए जरूरी चीजें खाना चाहिए

शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत सी मात्रा में किसी रोग के रोगाणु को इंजेक्शन द्वारा अथवा ड्रॉप के रूप में शरीर में पहुंचाना टीकाकरण कहलाता है यह रोगाणु टीके के माध्यम से शरीर में पहुंचाए जाने से बच्चा जीवन भर के लिए उन लोगों के बैंक परिणामों से सुरक्षित हो जाता है तथा रोगाणु  टीके के माध्यम से शरीर में पहुंचाए जाने से बच्चा जीवन भर के लिए उन लोगों के भयानक परिणामों से सुरक्षित हो जाता है

एंटी को में रोगाणु इतनी अधिक मात्रा में नहीं होते कि शरीर को रोगी बना सकें इनके कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से रोगाणु शरीर में प्रवेश कर भी जाएं तो रोग होता ही नहीं उसका प्रभाव बहुत कम प्रकट होता है

हम सभी चाहते हैं कि उनका बच्चा किसी रोग का शिकार ना हो इसके लिए बहुत जरूरी है कि समय पर बच्चों को टीकाकरण लगवा कर घातक बीमारी से बचाव किया जाए

प्रतिरक्षण टीके

1-  गर्भावस्था के 16 से 36 सप्ताह में

कम से कम 1 माह के अंतर पर टीटी के दो टीके

मां और नवजात शिशु का टिटनेस से बचाव

2-    1:30 से 9:00 माह

बीसीजी का एक टीका। तपेदिक से बचाव

डेढ़ से 9 माह तक

1 से 2 माह के अंतर पर डीपीटी के 3 तरीके और पोलियो तीन की खुराक हेपेटाइटिस 1 2 3

गला घोटू काली खांसी टिटनेस और पोलियो से बचाव

3-  6 से 12 माह

खसरा का एक टीका

खसरा से बचाव

16 से 24 माह

डी पी टी बूस्टर का एक टीका

गलाघोटू और टिटनेस काली खांसी और पोलियो से बचाव

4-   5 से 6 साल तक

डी पी टी बूस्टर का एक टीका

गलाघोटू और टिटनेस से बचाव

5 से 6 साल तक

1 से 2 माह के अंतर पर टाइफाइड के दो टीके

5-   10 साल

टीटी बूस्टर का एक टीका

टिटनेस एवं टाइफाइड से बचाव

6-  16 साल

टी टी बूस्टर का एक तरीका

टाइफाइड का एक टीका

टिटनेस एवं टाइफाइड से बचाव

प्रतिरक्षा टीकाकरण में सावधानियां

1-  समय पर टीकाकरण नहीं हो पाया है तो डॉक्टर की सलाह देने से टीका लगवाएं

2-  दो टीको के बीच का अंतर 1 माह से कम नहीं होना चाहिए

3-  साधारण सर्दी जुकाम खांसी बुखार होने पर टीका लगवाना बंद नहीं करवाना चाहिए

टीकाकरण से पहले की सावधानी

1–  टीके का पूरा लाभ तभी मिलता है जब उसे समय पर लगवाएं

2–  टीके की सामान्य मात्रा दिलाने के बाद समय पर जरूरत उसकी पोस्टर खुराक पिलाना रोग से पूर्ण बचाव के लिए आवश्यक है

3–  टीका लगवाने से पूर्व है देख लेना आवश्यक है कि सूई निसंक्रमित हो तथा टीके का रखरखाव उचित हो।

टीकाकरण के बाद की सावधानियां

1–  टीका लगने के बाद बच्चे को एक या 2 दिन बुखार आए तो उसी तरह की अन्य कोई तकलीफ हो तो घबराना नहीं चाहिए यह तकलीफ  प्रकट करती है कि टीका उचित कार्य कर रहा है बच्चे के शरीर में प्रतिरक्षण बिकसित हो रहा है

2-  बीसीजी के टीके लगवाने पर 3 माह तक उस स्थान पर फफोले ना पड़े तो चिकित्सक को दिखाएं

3– खसरे का टीका बच्चे को 9 माह से पूर्व ना लकवा

इसे भी समझो

मां के प्रारंभिक दूध कोलेस्ट्रॉल में प्रतिरोधी क्षमता होती है शिशु के लिए दूध बहुत उपयोगी होता है जन्म के तुरंत बाद से ही बच्चे को स्तनपान कराना चाहिए

कुपोषण

पोषक तत्वों की कमी या अधिकता से कुपोषण तपन होता है इसके कई रोग हो जाते हैं

कुपोषण से होने वाले रोग

क्वाशियरकर

बच्चों में प्रोटीन की कमी से होने वाला क्वाशियरकर मुख्य रोग है। इस रोग में बच्चों के शरीर की वृद्धि रुक जाती है उन्हें भूख कम लगती है तथा शरीर पर सूजन आ जाती है बाल रूखे त्वचा चमक रहित हो जाते हैं तो अच्छा रूखी हो जाती है और उस पर काले चकत्ते पड़ जाते हैं आंखें कमजोर हो जाती हैं

उपचार

क्वाशियरकर का मुख्य कारण बच्चों में प्रोटीन की कमी होना है। बच्चों को प्रोटीन युक्त आहार जैसे मटर मूंग चना अरहर सोयाबीन आदि डालें भोजन में देना चाहिए इसके अतिरिक्त अनाज मूंगफली दूध आदि का सेवन भी लाभदायक है

सूखा रोग (रिकेटस)

शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाने से बच्चों को सूखा रोग अस्थि दुर्बलता या रिकेट्स हो जाता है शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस दोनों तत्व हड्डियों और दातों का निर्माण एवं उनको स्वस्थ बनाए रखने का कार्य करते हैं जब बालक के अंग तेजी से बढ़ रहे होते हैं तो उसे अस्थि तंत्र के निर्माण के लिए कैल्शियम और फास्फोरस दोनों खनिजों की अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है इसके अभाव में बच्चे कम विकसित होता है तथा शरीर अत्यंत दुर्बल हो जाता है जिसे सूखा रोग कहते हैं सूखा रोग ना हो इसके लिए बढ़ते हुए बच्चों को प्रतिदिन लगभग डेढ़ ग्राम कैल्शियम और डेड़ ग्राम फास्फोरस की आवश्यकता होती है

उपचार

सूखा रोग शरीर में कैल्शियम व फास्फोरस की कमी से होता है इन तत्वों की पूर्ति हेतु दूध दही पनीर अंडा दाल फल तथा पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना चाहिए दैनिक आहार में दूध तथा दही से बने पदार्थों को सम्मिलित करने से दोनों तक पदार्थ पर्याप्त मात्रा में सहज ही प्राप्त हो जाते हैं

इसे भी समझो

कैल्शियम तथा फास्फोरस का प्रभाव विटामिन डी की उपस्थिति में ही होता है जिन व्यक्तियों को कैल्शियम और फास्फोरस की विशेष रूप से आवश्यकता होती है उन्हें विटामिन डी युक्त भोजन का अधिक मात्रा मे सेवन करना चाहिए सूर्य से विटामिन डी प्राप्त होता है

रक्त अल्पता

किसी बालक के बजन का परीक्षण करने के पश्चात यह प्रतीत होता है कि बालक का वजन आवश्यक  से कम है बालक आलसी और स्वस्थ है चेहरे पर पीलापन झलक रहा है तो निश्चित ही वह रक्तक्षीढ़ता या रक्ताल्पता का शिकार है इस रोग में कुपोषण के फल स्वरुप होता है इस रोग में भी लाल रक्त प्रभावित हो जाते हैं स्वस्थ लाल रक्त कणों में हीमोग्लोबिन होता है जो रक्त को लालिमा देता है रक्तपालता की स्थिति में लाल रक्त कणों की रचना एवं क्रिया में अंतर आ जाता है

रक्त अल्पता के कारण

1– शरीर के किसी अंग से अधिक मात्रा में खून बह जाना

2– असंतुलित भोजन

रक्त अल्पता के कारण

1-  होटलों की लालिमा कम हो जाना

2-  शरीर का आलसी होना

3- शीघ्र थकान का अनुभव करना मेहनत का कार्य करने में असमर्थ रहना

4- सिर में दर्द का अनुभव करना

5- भूख कम लगना

रक्ताल्पता का कारण

1- रक्तक्षीणता से ग्रस्त रोगी का चिकित्सीय परीक्षण तथा रक्ताल्पता के आधारभूत कारणों को खोजना

2- खून में हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करने के लिए लौह तत्वों से युक्त भोजन पदार्थों को लेना

3- थकान से बचने के लिए पर्याप्त विश्राम स्वस्थ वातावरण संतुलित आहार लेना

लौह तत्व एक महत्वपूर्ण खनिज लवण हैं यह शरीर में 4 से 5 ग्राम तक उपस्थित होता है इसकी 70% मात्रा रक्त से हीमोग्लोबिन में तथा 30% मात्रा एक यकृत वृक्क  तथा अस्थि मज्जा में होती है

शरीर में लौह तत्व की दैनिक आवश्यकता 1 से 20 वर्ष तथा 15 से 20 मिलीग्राम पुरुष स्त्रियों हेतु 20 मिलीग्राम गर्भवती महिलाओं हेतु 40 मिलीग्राम तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं की 33 ग्राम है

इस पोस्ट में मैंने बच्चों के शारीरिक और मानसिक बिकास के बारे मे बताया है। और टीकाकरण के बारे मे जानकारी दी गई है। जिससे आपको अपने बच्चो की शुरू से शारीरिक और मानसिक बिकास करने की जानकारी मिलेगी।

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प्राथमिक उपचार ( कुछ प्राथमिक घटनाओं एवं उनके उपचार के बारे में)

प्रकृति ने हमारे शरीर की सुरक्षा की समुचित व्यवस्था का प्रबंध किया है फिर भी जीवन में कब कौन सी घटना हो जाए कहा नहीं जा सकता। जलना  हड्डी का टूटना लू लगना बुखार आना आदि में लापरवाही बरतने से रोग गंभीर रूप ले सकता है हम सभी को प्राथमिक उपचार के विषय में ज्ञान होना आवश्यक है डॉक्टर के आने के पूर्व की जाने वाली सेवा को हम प्राथमिक उपचार कहते हैं प्राथमिक उपचार की सुविधा के लिए हम प्राथमिक चिकित्सा एट का को आते हैं इस पर टिका में कुछ वस्तुओं एवं औषधीय होती हैं जिनमें से कुछ बाजार की है1 कुछ घरेलू सामग्री से बनी औषधियां रखी होती हैं प्राथमिक चिकित्सा के बारे में जानकारी होने पर हमें दूसरों के साथ-साथ स्वयं का भी उपचार कर सकते हैं घायल या बीमार व्यक्ति की अचानक चिकित्सा तो चिकित्सक से करता है  पर प्राथमिक चिकित्सा चिकित्सक के देखने के पूर्व तुरंत पहुंचाए जाने वाली सहायता रहता इस पोस्ट में हम प्राथमिक चिकित्सा के बारे में बताएंगे की व्यवस्था की दशा अधिक बिगड़ ना पाए इस पोस्ट में हम प्राथमिक चिकित्सा के बारे में पूरी जानकारी देंगे पोस्ट को पूरा पढ़ें

तेज बुखार- सामान्य रूप से एक स्वस्थ व्यक्ति का औसत तापमान 98 पॉइंट 4 4 एंड हाइट रहता है जब किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान 98.4 डिग्री फॉरेनहाइट से अधिक हो तब से बुखार होता है। 98.4 से 100 डिग्री फॉरेनहाइट तब तक रोगी लगभग सामान सा रहता है किंतु इससे अधिक युवा होने पर रोगी में बेचैनी बढ़ जाती है। और वह अधिक कमजोरी महसूस करता है। सामान्य रूप से बुखार में चार चार घंटे बाद शरीर का थर्मामीटर से लेकर नोट किया जाता है परंतु पुकार की दीप स्थिति में दो-दो घंटे बाद तापमान की सारणी बनानी चाहिए एग्जांपल के लिए यदि रोगी का आहार 2 घंटे बाद तापमान सेना है तो सुबह 6:00 बजे 8:00 बजे 10:00 बजे 12:00 बजे नाप ले और उसे नोट कर ले तेज बुखार से पीड़ित व्यक्ति की देखभाल में लिखित प्रकार से करनी चाहिए।

रोगी को हल्के एवं सुपाच्य भोजन दें जैसे खिचड़ी दूध साबूदाना स्वर्ग। रोगी को लगातार सावधानीपूर्वक ध्यान रखना चाहिए उसे हल्के कपड़े पहना और स्नान के स्थान पर गीले कपड़े से शरीर के बाद पहुंचकर स्वच्छ रखें यदि बुखार बहुत तेज है लेकिन पैर ठंडे है तो ऐसी स्थिति में के पैरों को गर्म रखने के लिए गर्म पानी की बोतल रखनी चाहिए। यदि तापमान एक्स एक्स डिग्री फॉरेनहाइट से अधिक हो तो शरीर को गीले वस्त्र से पोछना चाहिए। तापमान 103 डिग्री और 50 डिग्री फॉरेनहाइट हो गया है तो सिर पर ठंडे पानी की पट्टी रखनी चाहिए यदि बुखार कम ना हो रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए

लू लगना- अधिक देर तक धूप में तथा गर्म हवा में रहने से लू लग जाती है लू लगने पर ऐसे लक्षण प्रकट होते हैं

लक्षण- रोगी को बेचैनी होती है चक्कर आता है सिर में दर्द होता है शरीर का टेंपरेचर बढ़ जाता है रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है प्यार बहुत लगती है चेहरा लाल हो जाता है कभी-कभी अभी अजीत हो जाता है

उपचार- लू लगने पर लोहे का प्राथमिक उपचार करना चाहिए

रोगी को ठंडे और छायादार स्थान पर ले जाना चाहिए। उसकी कपड़े ढीले कर देनी चाहिए या कपड़े उतार देना चाहिए। सिर तथा गर्दन को ठंडे पानी से धोना चाहिए वहां पर परस मिलनी चाहिए प्ले स्टोर रोगी को पीने के लिए ठंडा पानी दिया जाना चाहिए कोई उत्तेजक पदार्थ नहीं देना चाहिए कच्चे बनेगा उबले हुए आम को मसल कर उसमें नमक भुना जीरा मिलाकर बना ले पानी पिलाने से रोगी को जो के प्रभाव में राहत मिलती है। पुदीने का पानी पिलाने से भी लाभ मिलता है। बारीक पिसी प्याजा आम रोगी को की हथेली और तलवों पर मले

लू से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए कभी फिर से खाली पेट ना निकले को पानी पीकर ही बार निकले आम का पना पिया बाहर निकलने पर सिरवा कांड अकेले खाने में कच्ची प्याज का प्रयोग करें

जलना या झुलसना- आग की लपट से किसी गम धातु से रासायनिक पदार्थों से तेजाब से बिजली की धारा करंट से पीड़ित होना जलना कहलाता है आप या गर्म तरल पदार्थों जैसे गर्म दूध चाय उबलते पानी गर्म तेल या घी घी से जलना जलना कहलाता है इन दोनों स्थितियों के प्रणाम एवं उपचार एक से होते हैं चलने की मात्रा एवं गंभीरता में अंतर होता है यदि व्यक्ति के शरीर के दो तिहाई भाग की त्वचा जल जाती है तो मैं अत्यधिक चिंताजनक है गंभीर रूप से जलने से शरीर के आंतरिक अवयव बुरी तरह प्रभावित हो जाते हैं और व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है

लक्षण- त्वचा का जल जाना। लाल पड़ जाना फफोले पड़ जाना तंतुओं का नष्ट हो जाना कपड़े का त्वचा से चिपक जाना अधिक चलने से इस रोगी को सदमा बजाना जैसे चेहरे का पीला पड़ना ठंड लगना धड़कन बढ़ जाना यदि ऐसे रोगी काशी ग्रुप 4 नहीं किया जाता है तो उसकी मौत पर हो सकती है

वस्त्रों में आग लग जाने पर उपचार- यदि खाना बनाते समय या किसी अन्य कारण से कपड़ों में आग लगती है तो रोगी को तुरंत कंबल से ढक कर जमीन पर लड़का ना चाहिए किंतु उसका मुंह खुला रहने देना चाहिए प्ले स्टोर जलते हुए मनीष पर कभी पानी नहीं डालना चाहिए अनीता गांव और भी अधिक गंभीर हो जाते हैं। रोगी के कपड़े जूते आदि उतार देना चाहिए यदि नहीं उतार सके तो जूतों को काट देना चाहिए पुलिस डॉग डॉगी को काटकर एकांत स्थान में कंबल उड़ा कर लेटा देना चाहिए उसको पीने को गर्म दूध और चाय देना चाहिए। यदि फफोले पड़ गए उनको छोड़ना नहीं चाहिए क्योंकि वे तब तक नीचे की कोमल त्वचा की रक्षा करेंगे जब तक नहीं तो जा नहीं आ जाती है। स्थान का खाने के सोडे के गोल से ड्रेसिंग करनी चाहिए तो बता देना चाहिए और उस स्थान पर नारियल का तेल लगा देना चाहिए थोड़ा हो तो जले हुए स्थान पर बरनोल नारियल का तेल कच्चा आलू आटे का घोल लगाया जा सकता है कभी-कभी व्यक्ति ताप तथा आ गया गर्म वस्तु के प्रत्यक्ष संपर्क में आने से जल जाता है इसका उपचार भी वैसे ही करें अन्य प्रकार से गंभीर रूप से चलने करते हैं

रासायनिक पदार्थों से जलना– रासायनिक पदार्थों से जलना बहुत अधिक गंभीर होता है तथा इसके परिणाम शरीर पर गहरे निशान बन जाते हैं

उपचार- रासायनिक पदार्थों से जलने पर तुरंत ही शरीर से कपड़े उतार कर जले हुए भाग को पानी से अच्छी तरह होना चाहिए यदि संभव हो तो जले हुए भाग पर कई मिनट तक बार-बार पानी डालना चाहिए

तेजाब या एसिड से जलना- तेजाब से जलना बहुत कमजोर होता है यह जिस स्थान पर गिरते हैं उसे तुरंत जला देते हैं

उपचार- यदि शरीर के किसी भाग पर तेजाब गिर पड़े तो उस भाग को तुरंत अमोनिया के गोल से धोना चाहिए ध्यान रहे पानी से कभी नहीं धोना चाहिए

बिजली से जलना- बिजली का करंट लगने पर व्यक्ति जल जाता है ऐसी विद्युत धारा का करंट अधिक घातक होता है ऐसे व्यक्ति की मौत भी हो सकती है परंतु करें मुझे बिजली यूज होती है बेड डीसी विद्युत धारा होती है जिससे करंट लगने पर झटके के साथ व्यक्ति दूर करता है तथा उसका शरीर संजना लगता है

उपचार- सर्वप्रथम बिजली के मेन स्विच को बंद कर देना चाहिए इसके बाद करंट लगे व्यक्ति को छुड़ाने के लिए हाथों में रबड़ के दस्ताने पहनकर लकड़ी के सहायता से छुड़ाना चाहिए घायल व्यक्ति को कंबल उड़ा कर लकड़ी के तख्त पर लेट आना चाहिए करंट लगे वालों पर जलने का मरहम लगाना चाहिए यदि दम घुट रहा हो तो कृत्रिम श्वास देनी चाहिए रोगी को गर्म दूध या चाय देना चाहिए रोगी को सदमे से बचाने के लिए उसे सांत्वना देने चाहिए अधिक जलने की स्थिति में प्राथमिक चिकित्सा के डॉक्टर के पास अथवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तुरंत पहुंचाना चाहिए

निर्जलीकरण- पानी जीवन का आधार है हमारे शरीर में 75% पानी होता है। यदि किसी कारणवश शरीर में इसकी कमी हो जाती है तो इसे निर्जलीकरण कहते हैं हमारे शरीर में निर्जलीकरण की स्थिति बार-बार दस्त होने एवं उल्टी होने से होती है

लक्षण- शरीर कमजोर हो जाना। हाथ पैर का ठंडा होना। थकान महसूस करना। किसी कार्य को करने की इच्छा ना होना। प्यास लगना।

उपचार- एक चम्मच जीवन रक्षक घोल को एक गिलास पानी में डालकर कई बार पिया। अगर घर में जीवन रक्षक घोल तुरंत उपलब्ध ना हो तो एक गिलास पानी में एक चम्मच चीनी प्लस एक चुटकी नमक डालकर मिलाएं रोगी को एक चम्मच बोल को कई बार से बंद कराने में लाभ मिलता है

सिर में चोट लगना- कभी कभी सिर के बाल गिरने अथवा किसी कारण से सिर में चोट लगने पर सिर की हड्डी टूट जाती है सिर की हड्डी टूटने से व्यक्ति बेहोश हो जाता है इसके साथ कभी कभी मनुष्य को भी हानि ब्रेन हेमरेज हो जाता है ऐसी स्थिति में ऐसे उपचार करने चाहिए

घायल व्यक्ति को कुर्सी पर बैठाना चाहिए जिससे उसका सिर ऊपर की ओर उठा रहे। सिर को एक और घुमा दे दे कान से खून बह रहा है तो उसे नीचे की और कर दें। किसी साफ कपड़े को ठंडे पानी में भिगोकर घायल व्यक्ति के सिर पर रखना चाहिए रोगी के कपड़े ढीले कर देनी चाहिए यदि व्यक्ति बेहोश बेहोशी दूर करने का प्रयास करना चाहिए। घायल को निगरानी में रखा था उठने खड़ा ना होने दें तुरंत सहायता उपलब्ध कराएं

हड्डी का टूटना- दुर्घटना होने पर शरीर में गांव सकता है शरीर की हड्डियां टूट सकते हैं सुबह उनके + उतर सकते हैं कभी कभी साधारण रूप से चलते चलते शिरडी से उतरते समय पैर मुड़ जाता है अथवा मोच आ जाती है खेलकूद या अन्य कार्यों को करते समय आकस्मिक घटनाओं आदि के कारण शरीर की मजबूती तथा चलने फिरने के लिए सुविधा देने वाले कंकाल तंत्र की एक या कुछ हड्डियां अपने स्थान से जब हट जाती हैं तो उसे मोर्चा ना कहते हैं यदि कोई हड्डी टूटी अटक जाती है तो उसे हड्डी का टूटना कहते हैं

साधारण हड्डी का टूटना- इस प्रकार के अस्थि भंग में अस्थि टूटती अवश्य है किंतु अपने स्थान पर ही रहती है टूटी हुई हंसते के पास मांसपेशियों में सूजन आ जाती है गांव नहीं होता है 30 को फ्रैक्चर कहते हैं

पच्चडी टूट- इस प्रकार की टूट खतरनाक होती है इस प्रकार की हड्डी टूट में हड्डी के सिरे एक दूसरे में घुस जाते हैं

संयुक्त टूट– इस प्रकार की हड्डी टूटने हड्डी के टूटे चले तो जागो फाड़ कर बाहर आ जाते हैं इसे कुली टूट भी कहते हैं

कच्ची टूट- इस प्रकार की टूट में हड्डियां टूटती नहीं चटक जाते हैं यह बच्चों की हड्डी में कैल्शियम और फास्फोरस की कमी के कारण होती है

उपचार- घायल को तीव्र पीड़ा का अनुभव होना तरह पवित्र स्थान पर सूजन का आ जाना हड्डी के टूटने के स्थान को हिलाने डुलाने में कठिनाई * हड्डी के टूटने से अंग का निष्क्रिय हो जाना हड्डी टूटने पर यदि उस जगह पर खून बह रहा है तो उसे रोकना चाहिए हड्डी टूटने के स्थान को हिलाया डोला या ना जाए टूटी हुई हड्डी पर किसी पटरी से लगाकर पट्टी बांध दिया जाए रोगी होश में है तो सिर्फ पीने के लिए तो चाय कॉफी देना ठीक रहता है

निष्कर्ष- प्राथमिक चिकित्सा का कार्य अत्यंत ही महत्वपूर्ण एवं कुशलता का है यह कार्य प्रत्येक व्यक्ति सादर रूप में नहीं कर सकता है इस कार्य को करने वालों में समाजसेवा की भावना का होना अत्यंत आवश्यक होता है उसमें मानवता सेवा के गुण होने चाहिए इसके साथ ही व्यक्ति को अपनी सुरक्षा के प्रति सजग होना चाहिए हमें यातायात के नियमों का पालन करना चाहिए सड़क पर सदैव अपने दाएं और चलना चाहिए जिससे दुर्घटना होने पर्चे में चोट लगने की संभावना कम रहती है खाना बनाते समय बिजली के उपकरणों का प्रयोग करते समय सावधानी बरतनी चाहिए दोस्तों अगर आपको यह पोस्ट और हमारी जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों को शेयर करें लाइक अगर कुछ गलती है तो कमेंट करके बताएं

सामान्य बीमारियां के लक्षण और उनसे बचाव और उनका इलाज

दोस्तों आज मैं इस पोस्ट में आपको सामान्य बीमारियों के बारे में जानकारी दूंगा। और बताऊंगा कि इन बीमारियों से कैसे बचा जा सकता है । इस पोस्ट को शुरू से लेकर लास्ट तक पढ़े। हमारे शरीर में विभिन्न रोगों के जीवाणु किसी ना किसी माध्यम द्वारा शरीर में प्रवेश करते हैं जो हमें रोग ग्रस्त कर देते हैं वैसे लोगों का सम्मान जल पूजन तथा वायु के द्वारा होता है परंतु बहुत से ऐसे लोग भी हैं जिनका सम्मान जीव जंतुओं द्वारा होता है मच्छर मक्खी आदमी रोगों के संबंध में सहायक होते है। एनाफिलीज मच्छर मलेरिया रोक का सम्मान करते हैं पिस्सू प्ले का क्यूल एक्स फाइलेरिया का।

मच्छर के काटने पर कौन कौन से रोग पैदा होते हैं। मलेरिया रोग एनाफिलीज मादा मच्छर के काटने से होता है। ए मच्छर जब स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो उसके रक्त में मलेरिया के कीटाणु प्रवेश कर रोग उत्पन्न करते हैं।

लक्षण- इस तरह के कई लक्षण प्रकट होते हैं। सर्वप्रथम लक्षण ज्वर है जो बार-बार उतरता चढ़ता है बुखार चढ़ते समय बहुत ठंड लगती है रॉकी कापता है कभी-कभी इसका जिम चलाता है इसका का मन होता है फिर भी भारी रहता है जब जब उतरता है तो पसीना आता है रोगी कमजोरी का अनुभव करता है और रक्त की बहुत कमी हो जाती है।

मलेरिया से पीड़ित भर्ती की देखभाल करते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए- मलेरिया के रोगी को पूर्ण आराम देना चाहिए सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए हल्का और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए अतिशीघ्र डॉक्टर से संपर्क कर मलेरिया की जांच कराकर इलाज करवाना चाहिए

मच्छर से बचने के उपाय- घर मैं यहां आस-पास के गड्ढों में पानी एकत्र ना होने दें क्योंकि मच्छरों का जन्म स्थानों में होता है कभी-कभी कूड़े के ढेरों में भी मच्छर एकत्र हो जाते हैं इसलिए वहां भी सफाई रखी जाए तालाबों में जल के ऊपर मच्छर मारने की रासायनिक दवा छिड़कने चाहिए जिससे मच्छर के लारवा मर जाएं। इस मच्छर से मच्छरों को बढ़ने से रोका जा सकता है साथ में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें तो मच्छरों के काटने से बचे रहेंगे

फाइलेरिया- फाइलेरिया के क्यूल एक्स जाति के मच्छर के काटने से होता है। क्यूल एक्स मच्छर कमरे में अंधेरे स्थानों तथा गहरे रंग के कपड़ों में छिपे रहते हैं रात्रि को स्थानों से निकलकर मनुष्यों को काटते हैं और उन्हें रोगी बना देते हैं

लक्षण- इसरो के निम्न वत पैरों में सूजन हो जाना चलने में परेशानी होना लक्षण प्रकट होने पर तुरंत अच्छे डॉक्टर से उपचार करवाना चाहिए फाइलेरिया से बचने के लिए भी वही उपाय अपनाना चाहिए जिसे जो बचा मलेरिया के होने पर किया जाता है

श्वसन संबंधी रोग- सभी को ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। है ऑक्सीजन हमारे शरीर में श्वसन क्रिया के द्वारा प्रवेश करती है यदि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न हो जाती है तो व्यक्ति अनेकों रोगों से ग्रसित हो जाता है।

जुकाम- लोग जुकाम को एक साधारण लोग समझ कर टाल देते हैं परंतु ऐसा नहीं है ब्लॉक आरटी निमोनिया तथा क्षय रोग जैसे गंभीर रोगी एक साधारण जुकाम से प्रारंभ हो सकते हैं

मौसम और वातावरण के तापमान में परिवर्तन जैसे किसी बंद और गर्म स्थान से सहसा खुले और ठंडे स्थान में जाना। मुख नासिका गरीबों में कोई दोष उत्पन्न हो जाना धूल धुआं अथवा रासायनिक पदार्थों से दूषित वायुमंडल जैसे कल कारखाने आदि से निकला दुआ। शरीर में प्रतिरोधक शक्ति का अभाव होने पर भी व्यक्ति शीघ्र जुकाम से पीड़ित हो जाते हैं भोजन में विटामिन की कमी अधिक धूम्रपान इस रोक के आक्रमण में सहायक होते हैं

लक्षण- फलों के चिन्ह प्रकट होने का समय 12 घंटे से 2 दिन का होता है सबसे पहले नासिका में भारीपन का अनुभव होता है सुरक्षित कपकपी लगना नासिका 17 नेत्र की सुविधाएं नासिक में मित्रों का लाल होना मस्तिष्क में पीड़ा होना जो होना आदि लक्षण प्रकट होते हैं

उपचार- यारों प्रारंभ होते ही सावधानी बरती जाए तो शीघ्र ही मुक्ति मिल सकती है इसके लिए निम्नलिखित बातें आवश्यक है पुलिस तो रोगी को चाहिए क्या तुम मुंह तथा अपनी इतना गर्म पानी से साफ कर लें विचार तथा काला पीकर आराम पूर्व अखिलेश जाए। शेख और खांसी आने पर साफ रुमाल को मुंह में रखकर खान से वापसी के। हल्का एवं सुपाच्य भोजन लेना चाहिए खाने में विटामिन ए और बी तथा खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में लेना आवश्यक है

स्वर यंत्र की सूजन- या रोग जुकाम के कारण होता है आवाज में परिवर्तन इसका सबसे बड़ा लक्षण है कभी-कभी कंठ से आवाज निकलना भी बंद हो जाती है। कंठ में खराश सता गोटन का अनुभव होता है शोषण तीव्र गति हो जाती है सांस लेने में कष्ट होता है अधिकतर रोगी को हल्का बुखार रहता है तथा नाड़ी की तीव्र गति हो जाती है

उपचार- रोगी के बिस्तर को गर्म रखना चाहिए। रोगी को गर्म पानी में एक चुटकी नमक डालकर गरारा कराना चाहिए। रोगी को सादा हल्का भोजन दिया जाना चाहिए।

निमोनिया- निमोनिया को फेफड़े की सूजन के नाम से भी पुकारते हैं एक ही फेफड़ा इससे प्रभावित होता है कभी-कभी दोनों ही फेफड़ा साथ-साथ या एक के बाद एक रोग से प्रभावित होते हैं इसे डबल निमोनिया कहते हैं

लक्षण- जुकाम हो जाने के लिए क्या दो या 3 दिन बाद तक रोगी हल्का जेवर तथा बेचैनी का अनुभव करता है पुलिस तो रोगी को प्रारंभ में भयंकर कब कब जाती है सर्दी के कारण दांत बजने लगते हैं सादर हटता रोगी को आदित्य बुखार होता है उसका ता 1 से 4 डिग्री फॉरेनहाइट 105 डिग्री फॉरेनहाइट तक हो जाता है नाड़ी की गति बढ़ जाती है और रोगी समझते जिसे लेने लगता है त्वचा गर्म और शुष्क हो जाती है चेहरा लाल हो जाता है भूख नहीं लगती है

उपचार- रोगी को तुरंत बिस्तर पर लेटा देना चाहिए पुलिस टॉप उसे उन्हें गर्म कपड़ों से डरना चाहिए इस तरह के लक्षण प्रकट होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए यदि समय पर उसका चित्र ने किया जाए तो रोगी की मृत्यु हो सकती है

उत्तम साथ सुखी परिवार की नीव है।- उत्तम स्वास्थ्य सुखी जीवन का परिचायक है उत्तम स्वास्थ्य का अर्थ है कि मनुष्य शरीर से मन से निरोगी हो तथा अपने दैनिक कार्य तान क्रियाकलापों को पूर्ण रुप से करने में सक्षम हैं स्वास्थ्य व्यक्ति स्वयं तो खुश ही रहता है यह साथी अपने परिवार को भी सुखी रखता है इसके विपरीत स्वस्थ व्यक्ति अपना कोई भी कार्य करने में असमर्थ रहता है साथी परिवार की भी देखभाल नहीं कर पाता है अतः अच्छा स्वास्थ्य सुखी परिवार के नीव है।

हमें उम्मीद है इस पोस्ट से आपको सामान्य बीमारियों के बारे में अच्छी जानकारी समझ आई होगी अगर आपको मेरी पोस्ट अच्छी लगी हो तो शेयर करें अपने दोस्तों को

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